10/15/2026

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भारत ही नहीं सम्पूर्ण विश्व जैन संस्कृति से भरा हुआ था :डा. राजमल जैन वैज्ञानिक इसरो

 

*बकस्वाहा /-* *// रत्नेश जैन/राजेश रागी //* वर्तमान में जैन समुदाय की बात जब होती है तो सर्व प्रथम अन्य लोग यह कहते हैं कि ये लोग 50 लाख से भी कम है। वहीं दूसरी और जैन लोगों का इतिहास इन्हें सबसे प्राचीन बताता है। पहली संस्कृति, पहला जीवन संस्कार और मनुष्य को इंसान बनाने का श्रेय इन्ही के प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ के नाम पर है।
यह विचार निकटवर्ती जैन तीर्थ द्रोणगिरि में चल रहे उत्तरांचल दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के स्वर्ण जयंती महोत्सव में पधारे डॉ राजमल जैन कोठारी , प्रमुख वैज्ञानिक, इसरो, ने पत्रकार वार्ता में व्यक्त किए। उन्होंने बताया कि धरती पर मानव संस्कृति के प्रथम निर्माता श्री ऋषभदेव थे । उन्होंने अपने जीवन काल में वर्तमान पृथ्वी के छह खंडों पर बिहार करते हुए विचन किया और हर जगह अपने शिष्य बनाए तथा निर्गंथ श्रमण संस्कृति की स्थापना की। प्रोफेसर राजमल जी जैन, जो 100 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके हैं , ने बताया कि संपूर्ण विश्व में जब prehistory से भी पहले के पुरातात्विक संख्या देखते हैं, भौगोलिक और सामाजिक इतिहास को समझते हैं या कई बार मूर्ति और कलाकृतियों को देखते है तो यह बात स्पष्ट हो जाती है कि इस संपूर्ण धरती पर केवल श्रमण संस्कृति का ही बोलबाला था, चाहे हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक। उन्होंने यह भी बताया कि उनके द्वारा चल रहे *” विश्व में श्रमण संस्कृति की खोज “* कार्यक्रम के अंतर्गत एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और दक्षिण अमेरिका में प्रचुर मात्रा में श्रमण संस्कृति के ही साक्ष्य मिले हैं, वही इतिहास की प्राचीनता भी इसकी ओर इशारा करती हैं।
इस संदर्भ में द्रोणगिरि में चल रहे महोत्सव में 21 मार्च को डॉ. राजमल जैन कोठारी जी एक सुंदर PPT स्लाइड्स ke साथ अपना व्याख्यान देने वाले है, जिसमें भगवान ऋषभदेव के अयोध्या से प्रशांत महासागर की यात्रा के साथ साथ वहां पर स्थापित श्रमण संस्कृति को प्राचीनता पर बात करेंगे, जो बाद में माया संस्कृति तक परिवर्तित होती गई।
प्रोफेसर राजमल जी जो बहुत पहले से उत्तरांचल दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी से जुड़े हुए हैं, बताया कि इस संस्था ने पिछले 50 वर्षों में श्रमण संस्कृति की भारत में धरोहरों का संरक्षण और संवर्धन किया है। श्री शैलेन्द्र जी जैन, अलीगढ़ अध्यक्ष जी ने इस क्षेत्र में किए गए कार्यों की चर्चा की।
कल मुनि श्री समत्व महाराज का वंदन करते हुए उत्तरांचल दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के सभी सदस्यों ने सम्मेलन की विस्तृत जानकारी दी। मुनि श्री ने आशीर्वाद दिया।

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