घोटाला:अतिथि शिक्षक, रसोईया,विद्यार्थी और व्यापारी को दर्शाया मजदूर
बिजावर जनपद पंचायत के अधिकारियों की मिली भगत से हो रहे घोटाले।।
बिजावर/ जनपद पंचायत क्षेत्र की ग्राम पंचायत कदवारा में ग्राम पंचायत कार्यों मैं व्यापक गड़बड़ी के गंभीर आरोपों है।
मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया से ग्रामीणों ने एक बार फिर शिकायत कर बताया कि कदवारा में शासन के कार्यों में फर्जी मस्टर रोल, फर्जी हाजिरी, फर्जी बिलिंग, शासकीय धन के दुरुपयोग एवं सार्वजनिक संपत्ति का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। और इन पर पूर्व में की गई शिकायत में गड़बड़ी पाए जाने के बाद भी दोषियों को स्थानीय अधिकारियों द्वारा संरक्षण देकर बचाया जा रहा है। इस संबंध में ग्रामीण अभिजीत सिंह परमार ने बताया कि
मनरेगा में फर्जी मजदूरी का खेल खेला जा रहा है।
सीएम हेल्पलाइन शिकायत क्रमांक 35320271 दिनांक 12 नवंबर 2025 एवं 14 अगस्त 2025 को भी शिकायत की गई थी। आरोप है कि ग्राम पंचायत द्वारा मनरेगा योजना के अंतर्गत ऐसे व्यक्तियों के नाम से मजदूरी भुगतान दर्शाया गया, जिन्होंने वास्तविक रूप से कोई कार्य नहीं किया।
जाँच प्रतिवेदन में स्वयं विभाग द्वारा यह स्वीकार किया गया कि
उत्तम लोधी (अतिथि शिक्षक), जॉबकार्ड क्रमांक 002/196, के नाम से
मस्टर रोल क्रमांक 20143 (26.01.2024 से 01.02.2024)
मस्टर रोल क्रमांक 20657 (02.02.2024 से 08.02.2024)
में मजदूरी दर्शाई गई। जबकि उक्त अवधि में वे विद्यालय में अध्यापन कार्य कर रहे थे।
सरकारी कर्मी, छात्र और व्यापारी भी बनाए गए ‘मजदूर’…..
शिकायत में यह भी उजागर हुआ कि शासकीय विद्यालय में रसोईया (मिड-डे मील कर्मी) चंदाबाई,सागर में अध्ययनरत छात्र धर्मेंद्र लोधी, किराना व्यापारी कुलदीप गुप्ता,गृहिणी
सोनल गुप्ता के नाम से बिना वास्तविक कार्य किए भुगतान आहरित कर लिया।
निर्माण कार्यों में फर्जी बिलिंग और अवैध सामग्री….
मनरेगा के साथ राज्य शासन की अन्य योजनाओं की राशि से कराए गए निर्माण कार्यों में भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं।पैराफिशियल स्टोन बॉन्ड – उत्तम सेन के खेत से बाबू लोधी के खेत तक,पैराफिशियल स्टोन बॉन्ड – जगना गोंड के खेत से फूलरानी के खेत तक,पिचिंग कार्य बरमदेव तालाब सहित
इन कार्यों में नए पत्थर क्रय का भुगतान दर्शाया गया। जबकि क्षेत्र में कोई वैध पत्थर खदान अस्तित्व में नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण अवधि के दौरान न तो ट्रैक्टर अथवा डंपर से पत्थर ढुलाई देखी गई और न ही किसी प्रकार की वैध आपूर्ति हुई। आरोप है कि पत्थर जंगल से अवैध रूप से अथवा पुराने निर्माण कार्यों को तोड़कर उपयोग में लिए गए।
खेल मैदान कदवारा से पत्थर हटाने के आरोप….
आरोप यह है भी है कि खेल मैदान कदवारा की बाउंड्री में लगे पत्थरों को हटवाकर निजी उपयोग में लिया गया। शिकायत के अनुसार यह कार्य सरपंच के ट्रैक्टर से कराया गया। जिसकी निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।
अधिकारियों की भूमिका पर सवाल…
शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह पूरा प्रकरण केवल मैदानी स्तर तक सीमित नहीं है।
ग्राम रोजगार सहायक,उपयंत्री,
सहायक यंत्री तथा जनपद पंचायत के संबंधित अधिकारी
मिली भगत कर गड़बड़ी को खुलेआम संरक्षण दे रहे हैं। शिकायतकर्ता ने जिला पंचायत सीईओ को बताया कि तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (MB), भौतिक सत्यापन के बिना भुगतान संभव नहीं है।
शिकायतकर्ता को ही बताया ‘आदतन शिकायती’… इस मामले में रोचक यह भी है कि
शिकायतों पर जनपद पंचायत स्तर से तथ्यों को छिपाकर भ्रामक उत्तर दिए जाने तथा जाँच प्रतिवेदन में शिकायतकर्ता को “आदतन शिकायती प्रवृत्ति का” बता दिया गया। शिकायतकर्ता ने इसे मानसिक प्रताड़ना एवं शिकायत को दबाने का प्रयास बताया है।
6 महीने से जिला पंचायत में लंबित मामला… यह पूरा प्रकरण जिला पंचायत छतरपुर में पदस्थ नारायण तिवारी के पास पिछले लगभग 6 महीनों से लंबित है। शिकायतें तथ्यात्मक रूप से सही पाए जाने के बावजूद अब तक दोषियों के विरुद्ध कोई ठोस प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई की गई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि मामले को लगातार लंबित रखकर प्रभावी कार्रवाई से बचने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि
ग्राम पंचायत कदवारा के सभी मनरेगा एवं अन्य शासकीय योजनाओं के कार्यों की उच्च स्तरीय, स्वतंत्र जाँच कराई जाए
दोषी पाए जाने पर पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज कर कठोर कार्रवाई की जाए,
शासन को हुई क्षति की पूरी राशि की वसूली की जाए,
जाँच पूर्ण होने तक पंचायत के कार्यों के भुगतान पर रोक लगाई जाए।
