औपचारिकता पूरी कर दफ़न हो गया जल गंगा संवर्धन अभियान
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सुरेन्द्र अग्रवाल
आगामी 30 जून तक चलने वाला जल गंगा संवर्धन अभियान छतरपुर नगर में 19 मार्च को फोटोशेसन के साथ ही फाइलों में दफन हो गया है।
दिलचस्प है कि मुख्यमंत्री के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की शुरुआत छतरपुर नगर में एक ऐसे स्थान से किया गया जिसे किसी भी सूरत में तलैया नहीं कहा जा सकता।सांतरी तलैया के नाम से विख्यात यह स्थल गंदे पानी का गटर बना हुआ है।बस स्टैंड की सारी गंदगी इसी तलैया में समाहित होती है। इसके अलावा आसपास स्थित अधिकांश मकानों के सैप्टिक टैंक इससे जुड़े हुए हैं।इस तलैया का पानी जानवर भी उपयोग नहीं करते हैं।पता नहीं संजय ने अपनी दिव्य दृष्टि से किसे यह दृष्टि दे दी कि इस महत्वपूर्ण अभियान का शुभारंभ इसी तलैया से किया जाना उपयुक्त रहेगा। वैसे वर्तमान में इस दुर्भाग्यपूर्ण तलैया के दिन फिरने वाले हैं। क्योंकि नगरपालिका इसका कायाकल्प करने जा रही है।
नगरवासियों की उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता के कारण छतरपुर नगर के सभी जलस्रोतों की दुर्दशा देखकर अत्यंत पीड़ा होती है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक नगर में 11 तालाब दर्ज हैं। कालांतर में केवल सात तालाब कागजों में जिंदा दिखाई देते हैं,उनकी भी सांसें कब थम जाएं इसका कोई भरोसा नहीं है। क्योंकि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की कृपा से भू माफिया ने तालाबों की अधिकांश भूमि को बाप का माल समझकर बेच डाला है अथवा स्वयं कब्जा कर लिया है।
एकमात्र नदी जो सिर्फ बरसात में उफान पर आती है वह भी गटर बनती जा रही है। नगर के तालाबों की रक्षा के लिए समाजसेवियों ने जबरदस्त आंदोलन किए,मुंडन तक कराया लेकिन मजाल? कि प्रशासन की तंद्रा भंग हुई हो। नगर की सीमा से लगे सौंरा तालाब पर बाहुबली रोज़ कब्जा ठोक रहे हैं।न कोई देखने वाला है और न कोई सुनने वाला है।
इतंजार कीजिए फोटो शेसन के दूसरे एपिसोड का।
