बंधक जमीन का नामांतरण, महेवा नायब तहसीलदार और पटवारी पर गंभीर आरोप
ग्राम पंचायत सुकवा में लाखों का बड़ा खेल उजाग
छतरपुर /जिले के ग्राम पंचायत सुकवा से राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला बड़ा मामला सामने आया है। यहां बैंक में गिरवी रखी गई जमीन का नामांतरण कर दिए जाने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस पूरे मामले में हल्का पटवारी और महेवा नायब तहसीलदार की भूमिका पर गंभीर संदेह जताया जा रहा है।
कैसे हुआ पूरा फर्जीवाड़ा?
जमीन पहले से ही सलैया ग्रामीण बैंक में बंधक थी
इसके बावजूद पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में “बंधक नहीं है” लिख दिया
बिना उचित जांच और सत्यापन के नामांतरण ऑनलाइन दर्ज कर दिया गया
यह पूरा घटनाक्रम राजस्व रिकॉर्ड में खुली छेड़छाड़ और नियमों की अनदेखी की ओर इशारा करता है।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
क्या यह सिर्फ लापरवाही है या सुनियोजित भ्रष्टाचार?
क्या पटवारी अकेले जिम्मेदार है या ऊपर तक मिलीभगत है?
बैंक में गिरवी जमीन का नामांतरण आखिर किसके दबाव में हुआ?
ग्रामीणों में भारी आक्रोश
गांव के लोगों ने कहा की हमारा भी बंधक जमीन का नामांतरण किया जाए अगर हम फाइल लगते हैं तो माननीय तहसीलदार महोदय तत्काल उसको खारिज कर देती हैं
“यह सीधा-सीधा राजस्व रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और जनता के साथ धोखा है।”
पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए
दोषी पटवारी और संबंधित अधिकारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो
फर्जी तरीके से हुए नामांतरण को तुरंत रद्द किया जाए
यह मामला सिर्फ एक गलती नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की गहरी साजिश की ओर इशारा कर रहा है। अगर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो इससे न सिर्फ बैंक बल्कि आम जनता का भरोसा भी पूरी तरह टूट सकता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस बड़े घोटाले पर क्या कार्रवाई करता है या मामला दबाने की कोशिश होती है।
इन का कहना
जब इस मामले में नायब तहसीलदार से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा—
शायद मैंने ठीक से देखा नहीं, जल्दबाजी में नामांतरण हो गया… इसे निरस्त कर दूंगी।”
