10/13/2026

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विना टेंडर प्रक्रिया अपनाये सीएमएचओ ने विवादित वर्ल्ड क्लास क़ो दिया वर्क आर्डर

कलेक्टर और जिला पंचायत के सीईओ को अँधेरे में रखकर किया फर्जीवाड़ा
छतरपुर / स्वास्थ्य विभाग के मुखिया डॉ. आर.पी. गुप्ता ने एक बार फिर भ्रष्टाचार और मनमानी की हदें पार करते हुए इंदौर की विवादित आउटसोर्स कंपनी वर्ल्ड क्लास सर्विसेस को 17 कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया। इस वर्क ऑर्डर की जानकारी लगते ही जिले भर में डॉ. गुप्ता की कार्यशैली को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आने लगी हैं। डॉ. गुप्ता के कारण कलेक्टर पार्थ जायसवाल की भी लगातार किरकिरी हो रही है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सीएमएचओ डॉ. आर.पी. गुप्ता ने गत 2 फरवरी को मलेरिया विभाग से जारी पत्र क्रमांक 183 के जरिए बिना किसी टेंडर प्रक्रिया अपनाए ही इंदौर की विवादित वर्ल्ड क्लास कंपनी को 17 कर्मचारी उपलब्ध कराने के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया। वर्ल्ड क्लास वही कंपनी है, जिससे मिलीभगत कर डॉ. गुप्ता ने पिछले साल बिना किसी साक्षात्कार के 172 कर्मचारियों की नियुक्ति कर ली थी।
इस गंभीर मामले में कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने सजगता दिखाते हुए जिला पंचायत की तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी तपस्या परिहार से जाँच कराई थी। इसके बाद 13 मार्च 2025 को पत्र क्रमांक 274/शिकायत-4/2025 के माध्यम से न केवल सभी नियुक्तियाँ रद्द कर दी गई थीं, बल्कि सीएमएचओ को निलंबित करने के लिए शासन को पत्र भी लिखा गया था।
कलेक्टर पार्थ जायसवाल के तीखे तेवरों को देखते हुए तत्कालीन कमिश्नर डॉ. वीरेंद्र सिंह रावत ने 28 मार्च 2025 को डॉ. गुप्ता को निलंबित कर दिया था। गौर करने वाली बात यह है कि छतरपुर कलेक्टर पार्थ जायसवाल और तत्कालीन कमिश्नर डॉ. रावत ने इस पूरे प्रकरण में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया था कि डॉ. गुप्ता ने वर्ल्ड क्लास सर्विस कंपनी से मिलीभगत कर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया है।
इतना ही नहीं, कलेक्टर की कार्रवाई के बाद 7 जुलाई 2025 को सेडमेप ने वर्ल्ड क्लास कंपनी का इन-पैनलमेंट समाप्त कर उसके सारे कार्य छीन लिए थे। इतना सब होने के बाद भी सीएमएचओ डॉ. गुप्ता का वर्ल्ड क्लास प्रेम कम नहीं हुआ। उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई को ताक पर रखकर एक बार फिर बिना किसी टेंडर प्रक्रिया अपनाए वर्ल्ड क्लास कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया।
जारी किए गए वर्क ऑर्डर में अजीबो-गरीब तर्क देते हुए लिखा गया है कि सेडमेप को मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए तीन पत्र लिखे गए थे, लेकिन जब वहाँ से मैनपावर उपलब्ध नहीं कराई गई, तब वर्ल्ड क्लास कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी किया जा रहा है। इतने वरिष्ठ पद पर होने के बावजूद डॉ. गुप्ता यह भूल गए कि किसी भी कार्य को बिना टेंडर प्रक्रिया के किसी भी फर्म को नहीं दिया जा सकता।

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