10/15/2026

Dhamaka News

Online Hindi News Portal

आवारा कलम से…..(तस्वीर)

-दिनेश अग्रवाल
निकम्मेपन का सूत्र वाक्य यही है कि—- बने रहो पगला,काम करेगा अगला, और जहां-जहां निकम्मे हैं वहां यही सूत्र वाक्य अब मूलमंत्र का स्थान ले रहा है,अभी दो- चार दिन की बात है जब खूंटी पर टंगे तारीखी कैलेण्डर बदल जायेंगे तब नव वर्ष का जश्न
मनाने वालों में उनकी भी
भागीदारी होगी जिनको पता ही नहीं चला कि कब पूरा साल गुजर गया
जो लोग कुछ ना करके भी सब कुछ का श्रेय खुद लेते है उन्हीं को लोग निकम्मा कहते हैं । वैसे यह शहर बहुत ही खुश किस्मत वाला है कि यहां निकम्मों का जरा भी अभाव नहीं है । कल की बात है जब एक आटो वाले से सवारी इस बात पर बहस कर रही थी कि सड़क देख कर आटो चला और आटो वाला कह रहा था कि साहेब
सड़क आप बताओ तो मैं वहीं से आटो चलाऊं । विकास के प्रयासों ने इस शहर को फिलहाल अभी विनाश के कगार पर खड़ा कर दिया है। अब सभी लोग ऊब कर एक दूसरे से जानना चाहते है कि यह सब कब तक चलेगा ?
आश्चर्य है कि सवाल का जबाब ना मिलने के बाद
भी पूंछने वाला खुश हो कर आगे बढ जाता है ।
कालरी, कोयले के नाम पर,रिलांयस गैस के नाम पर औ रेल्वे चौथी लाइन
के नाम पर पेड़ काटते जा रहे हैं और हम यह सुनने को- कि “मुगांवो
खुश हुआ”–“एक पेड़ मां के नाम” लगाये जा रहे हैं
पर्यावरण प्रेमी कहलाये जा रहे हैं ।
विश्व ध्यान दिवस उन्होंने भी बड़े चाव से मनाया जिनका ध्यान से सचमुच कोई लेना-देना नहीं है
वही ध्यानी यदि खस्ता हाल सड़कों पर ध्यानदेते तो शहर आज विनाश के कगार से हट कर विकास
की ऊंचाई छू रहा होता ।
नये साल में बास्केटबॉल
के सम राष्ट्रीय विजेता भले ही ना बन पाये हों पर राष्ट्रीय खेल के सफल
आयोजक बन कर तो उभर ही चुके हैं । हम जीतने में नहीं , जिताने में गौरवान्वित होते हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © arpluslive.online | For Website & News Portal Designing - Call or Whatsapp -79999-06109 | Newsphere by AF themes.